Aarti Hanuman

🧘 Category: Aarti 📅 20/12/14

 

 

 

 

 

आरती हनुमान जी की

 

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्‍ट दलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरवर काँपे, भूत पिशाच निकट नहीं झाँके।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई।

दे बीड़ा रघुनाथ पठाये, लंका प्रज्‍जवलि सिया सुधि लाये।

जगमग ज्‍योति अवधपुर राजा, घण्‍टा ताल पखावज बाजा।

शक्ति बाण लगा लक्ष्‍मण को, लाय संजीवन लक्ष्‍मण जिवायो।

पैठ पाताल तोरि यम-कारे, अहिरावण की भुजा उखारे।

बायी भुजा से असुर संहारे, दाहिने भुजा सन्त जन तारे।

अंञ्जनी पुत्र महा बलदाई, सन्‍तन के प्रभु सदा सहाई।

सुर नर मुनि जन आरती उतारें, जय जय जय हनुमान उचारें।

कञ्चन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंञ्जना माई।

जो हनुमान की जी आरती गावै, बसि बैकुण्‍ठ परम पद पावै।

लंका विध्‍वंस किये रघुराई, तुलसीदास स्‍वामी आरती गाई।

 

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